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यूट्रस में गांठ के कारण, लक्षण और इलाज

Category: Thyroid Cancer | Updated on March 2026

यूट्रस (बच्चेदानी) में गांठ को फाइब्रॉइड (Uterine Fibroid) कहते हैं। यह गैर-कैंसरयुक्त (non-cancerous) होती है। इसके मुख्य कारण हार्मोनल असंतुलन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का बढ़ना), आनुवंशिकी (परिवार में इतिहास) और मोटापा हैं। इसके इलाज में दवाइयों से लेकर सर्जरी (मायोमेक्टोमी या हिस्टेरेक्टॉमी) शामिल है।

बच्चेदानी में गांठ क्या होती है?

बच्चेदानी में गांठ को आम भाषा में रसौली और मेडिकल भाषा में यूटेरिन फाइब्रॉइड (Uterine Fibroid) कहा जाता है। यह बच्चेदानी (गर्भाशय) की मांसपेशियों में बनने वाली गैर-कैंसरयुक्त (Non-cancerous) गांठ होती है।

फाइब्रॉइड का आकार अलग-अलग हो सकता है—यह मटर के दाने जितना छोटा या एक बड़े फल जितना बड़ा हो सकता है। एक महिला में एक या एक से अधिक फाइब्रॉइड हो सकते हैं। ये बच्चेदानी की दीवार में, अंदर की ओर या बाहर की तरफ विकसित हो सकते हैं।

गांठ का आकार और उसकी जगह अलग होने के कारण हर महिला में इसके लक्षण भी अलग हो सकते हैं। कुछ महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होता, जबकि कुछ में ज्यादा पीरियड्स, दर्द, पेट में भारीपन या गर्भधारण से जुड़ी परेशानी हो सकती है।

बच्चेदानी में गांठ क्यों होती है?

बच्चेदानी में गांठ क्यों होती है, इसका एक पक्का कारण अभी तक पता नहीं है। हालांकि शरीर के हार्मोन (Hormones) और परिवार में पहले किसी को फाइब्रॉइड होने जैसी बातें इसके बनने की संभावना बढ़ा सकती हैं।

इसके पीछे कुछ बातें देखी जाती हैं:

  1. हार्मोन का असर: शरीर में बनने वाले estrogen और progesterone जैसे हार्मोन फाइब्रॉइड की बढ़त को प्रभावित कर सकते हैं।
  2. परिवार में पहले किसी को होना: अगर मां, बहन या परिवार की किसी करीबी महिला को फाइब्रॉइड रहा है, तो इसकी संभावना बढ़ सकती है।
  3. उम्र: फाइब्रॉइड पीरियड्स आने वाली उम्र में ज्यादा देखने को मिलते हैं। मेनोपॉज (Menopause) के बाद हार्मोन कम होने पर कई फाइब्रॉइड छोटे भी हो सकते हैं।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि बच्चेदानी में गांठ सिर्फ खान-पान या किसी एक आदत की वजह से होती है।

बच्चेदानी में गांठ के लक्षण क्या होते हैं?

बच्चेदानी में गांठ यानी यूटेराइन फाइब्रॉइड (Uterine Fibroid) या रसौली होने पर कई महिलाओं में कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। हालांकि, गांठ का आकार बड़ा होने या उसकी स्थिति के कारण कुछ महिलाओं में अलग-अलग समस्याएं हो सकती हैं।

इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • पीरियड्स में बहुत ज्यादा या लंबे समय तक ब्लीडिंग होना
  • पीरियड्स के दौरान तेज दर्द होना
  • पेट के निचले हिस्से में दबाव, भारीपन या दर्द
  • कमर के निचले हिस्से में दर्द
  • बार-बार पेशाब आना
  • गर्भधारण करने में परेशानी होना

बड़ी गांठ आसपास के ब्लैडर या आंत पर दबाव डाल सकती है, जिससे बार-बार पेशाब आने या पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है। यदि आपको ऐसे लक्षण लगातार महसूस हो रहे हैं, तो उचित जांच के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

क्या बच्चेदानी में गांठ से गर्भधारण में परेशानी हो सकती है?

हर फाइब्रॉइड गर्भधारण में परेशानी नहीं करता। बहुत सी महिलाएं फाइब्रॉइड होने के बावजूद सामान्य रूप से गर्भवती हो जाती हैं।

लेकिन गांठ की जगह और आकार महत्वपूर्ण होते हैं। अगर गांठ बच्चेदानी के अंदर की जगह को प्रभावित कर रही है, तो कुछ महिलाओं में गर्भधारण में परेशानी हो सकती है। कुछ मामलों में pregnancy के दौरान भी डॉक्टर को ज्यादा निगरानी रखनी पड़ सकती है।

अगर आप बच्चा plan कर रही हैं और जांच में बच्चेदानी में गांठ होना पता चला है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि pregnancy नहीं हो सकती। डॉक्टर ultrasound देखकर यह समझते हैं कि गांठ कहां है और क्या वह गर्भधारण को प्रभावित कर रही है।

बच्चेदानी में गांठ का पता कैसे चलता है?

कई बार फाइब्रॉइड का पता routine जांच में ही चल जाता है। अगर पीरियड्स बहुत ज्यादा हो रहे हैं, पेट में दर्द है या दूसरी परेशानी है, तो डॉक्टर कुछ जांच करवाने की सलाह दे सकते हैं।

आमतौर पर जांच इस तरह आगे बढ़ सकती है:

  1. अल्ट्रासाउंड (Ultrasound): इससे गांठ का आकार, संख्या और बच्चेदानी में उसकी जगह देखने में मदद मिलती है।
  2. वेजाइनल अल्ट्रासाउंड (Transvaginal Ultrasound): जरूरत पड़ने पर इससे बच्चेदानी और गांठ की ज्यादा साफ तस्वीर मिल सकती है।
  3. एमआरआई (MRI): कुछ मामलों में गांठ के बारे में ज्यादा जानकारी लेने के लिए MRI की जरूरत पड़ सकती है।

इन जांचों के बाद ही डॉक्टर यह तय करते हैं कि गांठ को सिर्फ देखना है या इलाज की जरूरत है।

बच्चेदानी में गांठ का इलाज कैसे होता है?

बच्चेदानी में गांठ का इलाज हर महिला में एक जैसा नहीं होता। अगर गांठ छोटी है और कोई परेशानी नहीं दे रही, तो कई बार सिर्फ नियमित जांच की जाती है।

अगर symptoms ज्यादा हैं, तो इलाज के विकल्पों में ये शामिल हो सकते हैं:

  1. दवाओं से इलाज: ज्यादा bleeding और दर्द जैसे लक्षणों को कम करने के लिए कुछ दवाएं दी जा सकती हैं। ज्यादा bleeding के कारण खून की कमी हो गई हो, तो उसके लिए भी इलाज किया जाता है।
  2. मायोमेक्टॉमी (Myomectomy): इसमें फाइब्रॉइड को निकाला जाता है और बच्चेदानी को रखा जाता है। अगर महिला आगे बच्चा चाहती है, तो कुछ मामलों में यह विकल्प देखा जा सकता है।
  3. अन्य प्रक्रियाएं: कुछ महिलाओं में गांठ के आकार, जगह और symptoms के अनुसार ऐसी procedures पर विचार किया जा सकता है जिनमें बड़ी surgery की जरूरत नहीं होती।
  4. हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy): कुछ खास स्थितियों में बच्चेदानी निकालने की surgery की सलाह दी जा सकती है। यह आमतौर पर तब सोची जाती है जब symptoms काफी ज्यादा हों और महिला आगे pregnancy की planning न कर रही हो।

कौन-सा इलाज सही रहेगा, यह केवल गांठ देखकर तय नहीं किया जाता। महिला की उम्र, symptoms, गांठ की जगह और future pregnancy की इच्छा भी इसमें महत्वपूर्ण होती है।

क्या बच्चेदानी में गांठ का ऑपरेशन जरूरी होता है?

नहीं। बच्चेदानी में गांठ (फाइब्रॉइड या रसौली) का ऑपरेशन हर मामले में जरूरी नहीं होता। अगर गांठ छोटी है, कोई खास लक्षण नहीं हैं या मरीज को इससे परेशानी नहीं हो रही है, तो डॉक्टर दवाइयों और नियमित जांच, जैसे अल्ट्रासाउंड, की सलाह दे सकते हैं।

वहीं, अगर गांठ के कारण बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, दर्द, गांठ का बढ़ना या गर्भधारण से जुड़ी परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर आगे के इलाज के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

इसलिए ऑपरेशन की जरूरत है या नहीं, यह गांठ के आकार, स्थान, लक्षण और महिला की pregnancy planning के आधार पर तय किया जाता है।

कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?

अगर पीरियड्स पहले से बहुत ज्यादा आने लगे हैं, कई दिनों तक bleeding होती है, पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द या भारीपन रहता है, बार-बार पेशाब आता है या गर्भधारण में परेशानी हो रही है, तो gynecologist से सलाह लेना बेहतर है।

अगर ultrasound में यूट्रस में गांठ मिली है, तो केवल रिपोर्ट देखकर डरने की जरूरत नहीं है। पहले यह समझना जरूरी है कि गांठ कितनी बड़ी है, कहां है और क्या वह आपकी सेहत या pregnancy को प्रभावित कर रही है।

सही जांच के बाद ही तय किया जा सकता है कि आपको सिर्फ निगरानी की जरूरत है, दवाओं की या किसी procedure की।

निष्कर्ष

बच्चेदानी में गांठ (फाइब्रॉइड या रसौली) एक आम समस्या है और ज्यादातर फाइब्रॉइड गैर-कैंसरयुक्त होते हैं। कुछ महिलाओं में इसके कोई लक्षण नहीं होते, जबकि कुछ में ज्यादा ब्लीडिंग, दर्द, पेट में भारीपन या गर्भधारण से जुड़ी परेशानी हो सकती है। इसका इलाज गांठ के आकार, स्थान, लक्षण और pregnancy planning को ध्यान में रखकर तय किया जाता है।

अगर आपको यूट्रस में गांठ है या इससे जुड़ी कोई परेशानी महसूस हो रही है, तो नोएडा की IVF विशेषज्ञ डॉ. श्रेष्‍ठा सागर तंवर, जिनके पास 16+ वर्षों का अनुभव है, से परामर्श लेकर अपनी स्थिति के अनुसार उचित जांच, इलाज और pregnancy planning के बारे में सलाह ले सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बच्चेदानी में गांठ क्यों होती है?

बच्चेदानी में गांठ (Fibroid) होने का एक ही कारण नहीं है। शरीर के हार्मोन (Hormones) और परिवार में पहले किसी करीबी महिला को फाइब्रॉइड होने जैसी बातें इसकी संभावना बढ़ा सकती हैं।

बच्चेदानी में गांठ होने के क्या लक्षण हैं?

बहुत ज्यादा या लंबे समय तक पीरियड्स, पेट के निचले हिस्से में भारीपन, दर्द, बार-बार पेशाब आना और ज्यादा bleeding के कारण कमजोरी इसके आम लक्षण हो सकते हैं। हालांकि कई महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होता।

क्या बच्चेदानी में गांठ से गर्भधारण में परेशानी हो सकती है?

हर फाइब्रॉइड pregnancy को प्रभावित नहीं करता। लेकिन कुछ गांठें, खासकर जो बच्चेदानी के अंदर की जगह को प्रभावित करती हैं, गर्भधारण में परेशानी पैदा कर सकती हैं।

क्या बच्चेदानी में गांठ का ऑपरेशन जरूरी है?

नहीं। अगर गांठ छोटी है और कोई परेशानी नहीं दे रही, तो सिर्फ नियमित जांच की जा सकती है। अगर symptoms ज्यादा हैं या गांठ pregnancy या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है, तो दवा या surgery की जरूरत पड़ सकती है।

क्या बच्चेदानी में गांठ कैंसर होती है?

ज्यादातर बच्चेदानी की गांठें यानी फाइब्रॉइड कैंसर नहीं होतीं। फिर भी किसी भी गांठ का सही कारण और प्रकार डॉक्टर की जांच के बाद ही पता चलता है।

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